परिवेश या परिधि का परिचय और विभिन्न भावों में प्रभाव

परिवेश या परिधि का परिचय और विभिन्न भावों में प्रभाव

परिधि या परिवेश एक अप्रकाशक उपग्रह होता है। अन्य अप्रकाशक उपग्रह के तरह यह भी स्वभाव से पापी होता है। फलदीपिका के अनुसार परिवेश जिस भाव में विराजित होता है, उस भाव से संबंधित कारक को जल या जल से संबंधित दोष के कारण या हानि देता है। अर्थात परिधि जिस भाव में विराजमान हो उस भाव को जल दोष लगता है।
कुंडली में परिवेश व्यतिपात की विपरीत दिशा में होती है यानी व्यतिपात से सप्तम भाव में परिवेश अवस्थित होता है।

कुंडली के द्वादश भावों में परिवेश का प्रभाव

1) कुंडली के प्रथम भाव में अवस्थित परिवेश के कारण, जातक बुद्धिमान, विद्वान, सच्चाई पर चलने वाला, शांतिप्रिय, धनी और दानशील होता है। जातक को उत्तम संतान का सुख प्राप्त होता है। जातक साफ-सुथरे हृदय वाला और अपने से बड़ों और गुरुजनों का प्रिय होता है।

2) द्वितीय भाव में स्थित परिवेश के कारण जातक समाज में पूजनीय व्यक्ति होता है। जातक आकर्षक व्यक्तित्व का स्वामी होता है। जातक को सभी प्रकार के सांसारिक सुख की प्राप्ति होती है। जातक धार्मिक क्रियाकलापों की ओर झुकाव रखने वाला व्यक्ति होता है। जातक समाज में एक शक्तिशाली व्यक्ति होता है।

3) तृतीय भाव में स्थित परिवेश के कारण जातक आकर्षक शरीर वाला और स्त्रीयों का प्रिय व्यक्ति होता है। जातक समाज के माननीय और सम्माननीय व्यक्तियों के साथ संबंध रखेंगा। जातक नौकरी पेशा वाला व्यक्ति होगा। जातक अपने अग्रज और गुरु का मान रखने वाला और सामान रखने वाला व्यक्ति होगा।

4) चतुर्थ भाव में स्थित परिवेश के कारण जातक भ्रमित मस्तिष्क वाला व्यक्ति होगा। वह अपने शत्रु के भी हित की बात सोचेगा। जातक बहुत ज्यादा दयालु प्रवृत्ति का व्यक्ति होगा। वह क्रूरता की बात भी नहीं सोच सकता है। जातक नृत्य संगीत कला इत्यादि में रुचि रखने वाला व्यक्ति होगा।

5) पंचम भाव में स्थित परिवेश के कारण जातक धनी व्यक्ति होगा। जातक उत्तम आचरण करने वाला व्यक्ति होगा। जातक आकर्षक व्यक्तित्व का मालिक होगा। जातक मधुर वचन बोलने वाला धार्मिक विचारों वाला और स्त्रियों का प्रिय व्यक्ति होगा।

6) षष्ठ भाव में स्थित परिवेश के कारण जातक धार्मिक, धनी, संतान के सुख को प्राप्त करने वाला, भौतिकवादी संसार की ओर बहुत ज्यादा झुकाव रखने वाला व्यक्ति होगा। जातक अपने शत्रु पर विजय प्राप्त करेगा।

7) सप्तम भाव में स्थित परिवेश के कारण जातक को अल्पसंतान का दोष होगा। जातक सुखों से वंचित रहेगा। जातक की कमजोर बुद्धि का व्यक्ति हो सकता है। जातक क्रूर प्रवृत्ति का व्यक्ति हो सकता है। जातक की पत्नी रोगों से सफर करेगी परेशान रहेगी।

8) अष्टम भाव में स्थित परिवेश के कारण जातक आध्यात्मिक विषय में बहुत ज्यादा रुचि रखने वाला व्यक्ति होगा। जातक शांतिप्रिय मस्तिष्क और अपने वचन पर स्थित रहने वाला व्यक्ति होगा। जातक मजबूत शारीरिक कद काठी का व्यक्ति होगा। जातक हमेशा धर्म और सच्चाई की बात करेगा। जातक सात्विक प्रवृत्ति का व्यक्ति होगा।

9)नवम भाव में स्थित परिवेश के कारण जातक को उत्तम संतान की प्राप्ति होती है। जातक आकर्षक व्यक्तित्व का मालिक होगा। जातक संतुष्ट और सुखी होगा। जातक धनी व्यक्ति होगा। जातक स्वाभिमानी होते हैं।

10) दशम भाव में परिवेश के कारण जातक मजबूत कद काठी का व्यक्ति होगा। जातक सभी प्रकार के शास्त्रों और विद्याओं का जानकार होगा। जातक संसारिक सुख का आनंद उठाएगा। जातक में जलन की भावना नहीं होगी।

11) एकादश भाव में स्थित परिवेश के कारण जातक को वैवाहिक जीवन का उत्तम आनंद प्राप्त होगा। जातक शौर्यवान और उत्तम विचारों वाला व्यक्ति होगा। जातक सभी का प्रिय होगा। जातक की जठराग्नि कमजोर होगी।

12) द्वादश भाव में स्थित परिवेश के कारण जातक खर्चीला प्रवृत्ति का व्यक्ति होगा जातक और कठिनाई का सामना करेगा जातक अपने गुरु और शिक्षकों का अपमान करेगा जातक स्वभाव से नीच प्रवृत्ति का व्यक्ति हो सकता है।

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