कुंडली के एकादश भाव में अष्टमेश का प्रभाव

कुंडली के एकादश भाव में अष्टमेश का प्रभाव

1)कुंडली के एकादश भाव में अष्टमेश का प्रभाव जानने के लिए सर्वप्रथम हम अष्टम भाव और एकादश भाव के नैसर्गिक कारक के संदर्भ में जानकारी प्राप्त करते हैं। अष्टम भाव का स्वामी स्वयं के भाव से भाव चतुर्थ भाव में स्थित है, अतः प्रथम भाव का स्वामी चतुर्थ भाव में क्या फल देता है, हम प्राप्त करते हैं।

2) अष्टम भाव का स्वामी एकादश भाव में स्थित है, अतः स्वयं के भाव से चतुर्थ अर्थात सुख के भाव में स्थित होने के कारण जातक को आयु का सुख प्रदान होता है अर्थात जातक दीर्घायु हो सकता है। एकादश भाव एक उपचय भाव भी है अतः इस कारण भी अष्टम भाव के नैसर्गिक कारकत्व में वृद्धि होती है, यह भी जातक के दीर्घायु होने का कारण हो सकती है। परंतु हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि अष्टम भाव कुंडली में दु: स्थान का स्वामी है, अतः यह जातक के जीवन में परेशानियां और कठिनाइयों में भी वृद्धि करेगा।

3) एकादश भाव लाभ स्थान है। अष्टम भाव हानि का कारक भाव है। अतः जब अष्टमेश एकादश भाव में स्थित हो तब जातक के लाभ को यह प्रभावित करता है। जातक धन अर्जित करने में परेशानियों का सामना कर सकता है। जातक आर्थिक कठिनाइयों का सामना कर सकता है। जातक को अचानक से आने वाली मुसीबतों के कारण फाइनेंशियल क्राइसिस का सामना करना पड़ सकता है। जातक सट्टेबाजी या जुआ खेलने की प्रवृत्ति के कारण भी अपने धन का नाश कर सकता है। यदि अष्टम भाव का स्वामी एकादश भाव में शुभ स्थिति में हो तब जातक सट्टा या अपने चीजों के परखने की खासियत के चलते अच्छा धन अर्जित कर सकता है। जातक रिसर्च वर्क से भी अच्छा धन अर्जित कर सकता है। जातक अपने गुप्त ज्ञान से भी धन अर्जित कर सकता है। जातक के सीक्रेट इनकम सोर्स हो सकते हैं। यदि अष्टम भाव का स्वामी एकादश भाव में पीड़ित हो तब जातक गैंबलिंग जैसी गतिविधियों के कारण अपने धन का लाभ नाश कर सकता है। जातक कर्ज से परेशान रह सकता है। जातक सरकार से भी परेशान रह सकता है।

4) अष्टम भाव का स्वामी एकादश भाव में स्थित हो तब यह जातक को कामुक प्रवृत्ति का बनाता है। जातक सेक्सुअल मैटर में चरित्रहीन हो सकता है। जातक की कामोत्तेजना उच्च होती है। जातक की एक से ज्यादा संबंध हो सकते हैं। यदि अष्टम भाव का स्वामी एकादश भाव में पीड़ित हो तब जातक को गुप्तांगों से संबंधित रोग हो सकता है। अष्टम भाव बदनामी का कारण भी होता है। अतः पीड़ित अष्टमेश एकादश भाव में जातक को स्त्री के कारण बदनामी का भी कारण हो सकता है।

5)एकादश भाव बड़े भाई से संबंधित होता है। अष्टम भाव बाधा, कठिनाइया, परेशानी का कारक भाव होता है। यदि अष्टम भाव का स्वामी एकादश भाव में स्थित हो तब जातक को अपने बड़े भाई से परेशानी होती है। जातक के अपने भाइयों से वैचारिक मतभेद हो सकते हैं। जातक अपने भाई से अलग रह सकता है। यदि अष्टम भाव का स्वामी एकादश भाव में शुभ स्थिति में हो तब जातक के बड़े भाई समृद्ध होते हैं और समाज में अच्छी पोजीशन प्राप्त करते हैं।

6) एकादश भाव फ्रेंड सर्किल से संबंधित होता है। यदि एकादश भाव में अष्टम भाव का स्वामी स्थित हो तब जातक की फ्रेंड सर्किल अच्छी नहीं होती है। जातक की दोस्ती बुरी संगत वाली लोगों के साथ हो सकती है। जातक के दोस्त जातक के लिए परेशानी का सामना बन सकते हैं।

7) यदि अष्टम भाव का स्वामी एकादश भाव के स्वामी के साथ एकादश भाव में स्थित हो तब जातक सट्टेबाजी से अच्छा धन अर्जित कर सकता है। जातक गुप्त स्रोत से या अनैतिक कार्यों से भी धन अर्जित कर सकते हैं। यदि अष्टमेश एकादश भाव में पीड़ित हो तब जातक अपने प्रोफेशनल लाइफ में परेशान रह सकता है। जातक के को अपने बड़े भाई से समस्या हो सकती है। जातक की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं होती है

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *